रायपुर – छत्तीसगढ़ के चर्चित 2000 करोड़ रुपए के शराब घोटाले का दायरा अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इस घोटाले में जेल में बंद राज्य के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने EOW को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत की बेंच में हुई। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की गई है।
कवासी लखमा ने पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत की गुहार लगाई थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। EOW की ओर से दायर मामले में लखमा पर आरोप है कि मंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य की सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच एजेंसी के मुताबिक, 2019 से 2023 के बीच शराब के ठेके और सप्लाई सिस्टम में ऐसी हेराफेरी की गई जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ, जबकि कुछ निजी कंपनियों को अवैध लाभ मिला।
इस पूरे मामले में अब तक कई अधिकारी और कारोबारी गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब सप्लाई और वितरण के नाम पर एक समानांतर तंत्र खड़ा कर दिया गया था, जिसमें करोड़ों रुपए की हेराफेरी की गई।
EOW की चार्जशीट के अनुसार, शराब ठेके से लेकर वितरण तक का नियंत्रण एक संगठित गिरोह के हाथ में था, जो राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहा था।
कवासी लखमा का नाम इस घोटाले में तब प्रमुखता से सामने आया जब जांच में यह खुलासा हुआ कि आबकारी विभाग की नीतियों में किए गए कुछ संशोधनों का सीधा लाभ उन कंपनियों को मिला जिनके साथ उनके नजदीकी रिश्ते बताए जा रहे हैं। लखमा ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है और उन्होंने अपने कार्यकाल में किसी भी अवैध लाभ को बढ़ावा नहीं दिया।
छत्तीसगढ़ में यह मामला सिर्फ एक वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि राजनीतिक संकट में बदल चुका है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हो, जबकि सत्तारूढ़ दल का दावा है कि जांच एजेंसियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने दी जा रही है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अगर EOW अपने जवाब में ठोस सबूत पेश करती है, तो कवासी लखमा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
वहीं, अगर कोर्ट को लगे कि जांच में पक्षपात या विलंब हुआ है, तो जमानत की संभावना भी बन सकती है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में कवासी लखमा हमेशा से एक प्रभावशाली आदिवासी चेहरा रहे हैं — बस्तर के गहरे जंगलों से निकलकर उन्होंने राजधानी रायपुर तक अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन अब वही नेता 2000 करोड़ के घोटाले के घेरे में हैं, और पूरा राज्य इस सवाल का इंतज़ार कर रहा है कि क्या यह मामला सच में “भ्रष्टाचार की जड़” तक पहुंचेगा या फिर राजनीति की धूल में दब जाएगा। #kawasilakhma #kawasilakhmaletestnews #cgpolitics #chhattishgarhliqurescham #liqureshcham #congressscham #bjp #शराबघोटाला







