सुकमा – कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने शुक्रवार को अपने कार्यालय में बुलायी गई शिक्षा समीक्षा बैठक में तिमाही परीक्षाओं के आंकड़े पुरज़ोर तरीके से परखे और जिन स्कूलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया, उनके प्राचार्यों को कड़ी चेतावनी दी। बैठक में चेतावनी यह साफ कर गई कि हाफ-इयरली परीक्षा तक सुधार न दिखा तो प्रशासन अनुशासनात्मक कदम उठाने से नहीं हिचकेगा।
बैठक में जिला पंचायत के सीईओ मुकुंद ठाकुर, जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी और कई स्कूल प्राचार्य मौजूद रहे। अधिकारीयों से आग्रह किया गया कि वे विषय-दर- विषय कमजोरियों की पाठ्य-रणनीति बनाकर लागू करें और समय-समय पर मॉनिटरिंग करें ताकि नतीजों में वास्तविक सुधार दिखे।
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए जिला स्तर पर अध्ययन योजनाएँ तथा प्रश्न बैंक तैयार होंगे और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने हेतु उत्तरपुस्तिकाओं का क्रॉस-आकलन अन्य स्कूलों के शिक्षकों से कराया जायेगा। लक्ष्य यह है कि मूल्यांकन मानक समान और निष्पक्ष रहे।
कमज़ोर विद्यार्थियों की पहचान हेतु विषयवार विश्लेषण कर विशेष कक्षाएँ तथा ट्यूटरिंग की व्यवस्था की जाने का निर्णय लिया गया। कलेक्टर ने दो माह के भीतर पुनः समीक्षा बैठक बुलाने के आदेश दिए ताकि उठाये गये सुधारात्मक कदमों की प्रभावशीलता जाँची जा सके।
विद्यालयों में अपार आईडी के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि यह आईडी छात्र का शैक्षणिक जीवन संलग्न करने, फंड-योजनाओं और प्रवेशकों को डिजिटल रूप से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए हर छात्र की अपार आईडी समय पर बनवाने का निर्देश दिया गया।
बेसिक दस्तावेज़ों में त्रुटि—विशेषकर आधार में माता-पिता के नाम में गलती—तेजी से सुधरवाने के निर्देश दिए गए। ईडीएम अधिकारी ने बताया कि ऐसे मामलों में स्कूल प्राचार्य के सत्यापन हस्ताक्षर से सुधार की प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है और ईडीएम व विद्यालयों के समन्वय से अपार आईडी बनवाने का कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा।
कलेक्टर ने बैठक के अंत में स्पष्ट कहा कि जिले के शैक्षिक परिणामों में सुधार ला कर ही माहौल बदलेगा और इसके लिए सभी विभागिक स्तर पर सहयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने शिक्षकों और प्रशासन से मिलकर काम करने का अनुरोध भी किया।







